झारखंड में राज्यस्तरीय भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता हेतु छात्र आंदोलन: एक विस्तृत रिपोर्ट
झारखंड में राज्यस्तरीय भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता हेतु छात्र आंदोलन: एक विस्तृत रिपोर्ट
झारखंड राज्य में लोक सेवा आयोग (JPSC) एवं कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार के विरुद्ध अभ्यर्थियों द्वारा व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। जुलाई 2026 के अंतिम सप्ताह से राजधानी रांची के बापू वाटिका से प्रारंभ हुआ यह आंदोलन वर्तमान में राज्यव्यापी प्रशासनिक एवं सामाजिक ध्यानाकर्षण का केंद्र बन चुका है।
आंदोलन के मुख्य कारण
आंदोलन का मुख्य बिंदु 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रारंभिक परीक्षा में कथित रूप से हुई धांधली है। अभ्यर्थियों द्वारा सोशल मीडिया पर प्रसारित एक उत्तर-पुस्तिका (OMR Sheet) के आधार पर यह आरोप लगाया गया कि न्यूनतम अंक प्राप्त न करने वाले अभ्यर्थियों को भी उत्तीर्ण श्रेणी में सम्मिलित किया गया। इस घटनाक्रम ने पूर्व में JSSC परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं के कारण अभ्यर्थियों में व्याप्त असंतोष को और अधिक तीखा कर दिया।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगेंरांची स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम एवं निकटवर्ती क्षेत्रों में एकत्र अभ्यर्थियों ने निम्नलिखित मांगें प्रस्तुत की हैं:
- केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा जांच: परीक्षा प्रक्रिया में कथित पेपर लीक एवं वित्तीय अनियमितताओं की उच्चस्तरीय तथा निष्पक्ष जांच हेतु मामले को सीबीआई को सौंपा जाए।
- विवादित परीक्षा का निरस्त्रीकरण: 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणामों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
- आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार: भविष्य की चयन प्रक्रियाओं में शुचिता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु JPSC एवं JSSC के संगठनात्मक ढांचे में नीतिगत सुधार किए जाएं।
प्रशासनिक कार्रवाई एवं वर्तमान स्थिति
अगस्त 2026 के द्वितीय सप्ताह में आंदोलन के अधिक तीव्र होने के पश्चात, राज्य प्रशासन द्वारा कानून-व्यवस्था बनाए रखने हेतु आवश्यक कदम उठाए गए। विधानसभा घेराव के प्रयास के दौरान पुलिस बल द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने हेतु बल प्रयोग किया गया।
यद्यपि राज्य सरकार द्वारा आपराधिक अनुसंधान विभाग (CID) के माध्यम से जांच आरंभ की गई है तथा कुछ संबंधित अधिकारियों एवं उत्तरदायी निकायों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है, तथापि आंदोलनकारी छात्र केंद्रीय एजेंसी द्वारा स्वतंत्र जांच की मांग पर अडिग हैं। यह स्थिति अभ्यर्थियों के भविष्य की सुरक्षा एवं राज्य की प्रशासनिक चयन प्रक्रियाओं में जनविश्वास की पुनः स्थापना की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है।
Comments
Post a Comment